Health Blog

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Do read interesting articles by Dr. Pooja Pathak, Founder and Occupational Therapist, Swavalamban – on Health, Wellness, Lifestyle, Childhood disorders, Parenting, Therapies n many more… Also find latest updates on major Social Issues..

 

Stay Healthy n Keep Reading..!! 🙂 🙂 

Let’s Talk, Let’s Care Depression

Posted by on Apr 7, 2017 in Swavalamban Blog

Lets Talk, Lets Share. Depression is Curable ( Representational Image only/ pic source - holydayspot)

Lets Talk, Lets Share. Depression is Curable ( Representational Image only/ pic source – holydayspot)

 ना छिपाएं, ना दबाएं – आओ अब खुलकर बताएं.. मानसिक स्वास्थ्य सुदृढ़ बनाये, अवसाद को दूर भगाएं… 

 

Today is World Health Day, n the Theme for this year is ” Depression” which is one of the leading cause of disability all around the globe. डिप्रेशन या अवसाद ना सिर्फ वयस्कों अपितु बुजुर्गों और यहाँ तक की बच्चों को में भी हो रहा है.

 

 

People from all age groups are suffering from it, more than 300 million people are now living with depression, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार  there is an increase of more than 18% between 2005 and 2015, whereas in South-East Asia region, nearly  86 million people are affected by depression. 

 

 

 

Symptoms of Depression in children are- 
१. बच्चे के दैनिक क्रियाओ में परिवर्तन आना
२. सामाजिक मेल-जोल की कमी होना
३. दोस्तों से कम बात करना
४. ज्यादातर समय अकेले गुमसुम होकर बैठे रहना
५. भूख कम लगना या फिर बहुत ज़्यादा खाना
६. किसी भी काम में मन नहीं लगना
७. पढाई में पिछड़ना

८. निराशावादी बातें करना
९. बात बात में रोना
१०. बहुत कम बोलना
११. खेल और अन्य मनोरंजक गतिविधियों में रूचि कम होना
१२. आत्मविश्वास में कमी होना
१३. नकारात्मक बातें करना
१४. ध्यान केंद्रित नहीं कर पाना
१५. व्यव्हार में चिड़चिड़ापन, गुस्सा या घबराहट होना
१६. नींद में कमी होना या फिर ज़्यादा देर तक सोना
१७. हमेशा थका हुआ प्रतीत होना
१८. रिस्क लेने वाले काम करना
१९. मृत्यु सम्बन्धी बातें करना

 

 

When a depressive state, or mood, lingers for a long time — weeks, months, or even longer — and limits a person’s ability to function normally, it can be diagnosed as depression. 

 

According to a recent study, it has been estimated that nearly 50 millions Indians r suffering from one or other type of Mental Health related issues/disorders. however there is no exact data as people are too shy to discuss these issues. हमारे भारत में आज भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विषयों को लेकर कितनी हे भ्रांतियां फैली हुई है. महानगरों जहाँ फिर भी बेहतर हालात है, सबसे ज्यादा ख़राब स्तिथी छोटे शहरों एवं कस्बों की है जहाँ न इन विकारों/विषयों के प्रति लोगों में जागरूकता है और न ही किसी भी प्रकार के परामर्श-केंद्र हैं. 

 

 

 

Types of depression in children :
1. major depression
2. dysthymia
3. adjustment disorder with depressed mood
4. seasonal affective disorder
5. bipolar disorder or manic depression

 

 

 

 

Depression is not a sign of weakness. Any person at one or the other time in his/her life will feel low. Depression can be cured completely. All We need is to reach out to each other…

 

 

 

Treatment:

 

सही पोषण आहार, पर्याप्त नींद, अपनी पसंद के कार्य जैसे गार्डनिंग, संगीत, डांस, आर्ट एंड क्राफ्ट वर्क, आदि में अपना वक़्त बिताना, साथ हे परिजनों/दोस्तों के साथ समय बिताना, following a Healthy lifestyle will helps a lot in overcoming Depressive phase. 

 

 

Also engaging in physical- mental workouts, Yoga n Meditation will also relieve from stress. 

 

 

1. Pharmacological Intervention
Antidepressants:
Several classes of antidepressants, including selective serotonin reuptake inhibitors (SSRIs), tricyclic antidepressants (TCAs), heterocyclics (eg, amoxapine, maprotiline), monoamine oxidase inhibitors (MAOIs), bupropion, venlafaxine, and nefazodone, have been used in the treatment of depression.
Selective serotonin reuptake inhibitors (SSRIs)
These are a relatively new group of medicines used to treat emotional and behavioral problems, including depression, panic disorder, obsessive-compulsive disorder, bulimia, and posttraumatic stress disorder in adults. 
2. Cognitive-behavioral therapy
CBT is a type of talk therapy that has been scientifically shown to be effective in treating anxiety disorders. CBT teaches skills and techniques to child to reduce anxiety.
3. Acceptance and commitment therapy
ACT uses strategies of acceptance and mindfulness (living in the moment and experiencing things without judgment) as a way to cope with unwanted thoughts, feelings, and sensations.
4. Dialectical behavioral therapy
DBT emphasizes taking responsibility for one’s problems and helps children examine how they deal with conflict and intense negative emotions.
5. Psychotherapies eg, individual, family, group therapies
6.Social skills training
7. Educational assessment and planning

 

 

 

So, Let’s Talk, Let’s Share n Cure Depression…

 

 

Stay Healthy..!! 

 

 

Dr. Pooja Pathak

 

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The Mystery n Traits of Autism

Posted by on Apr 1, 2017 in Swavalamban Blog

 

asd puzzleक्या आप जानते हैं की विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) के अनुसार पूरी दुनिया में प्रति १६० बच्चों में से १ बच्चा ऑटिज्म नामक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार से पीड़ित हैं।

दिनोंदिन तेजी से इस सामाजिक- मानसिक विकार से ग्रसित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कुछ रिसर्चेस के निष्कर्षों के आधार पर यह सामने आया है की किन्ही अनुवांशिक कारणों एवं प्राकृतिक बदलाव की वजह से यह डिसऑर्डर होता है. 

 

 

जहाँ अमेरिका में यह आंकडा प्रति ६० मे से १ है, ब्रिटेन में १०० में से १, कोरिया में प्रति ३८ में १ है, वहीं हमारे भारत में जागरूकता एवं डायग्नोसिस के अभाव तथा राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण नहीं होने से कोई स्पष्ट आंकडे तो नहीं है, परंतु इंटरनेशनल इपिडेमियोलाजिकल रिसर्च सेंटर (IERC) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार हमारे देश में भी प्रति १५० से ३०० बच्चों के बीच १ बच्चा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर से ग्रसित है।

Children having Autism face problems in many areas

Children having Autism face problems in many areas

 

वहीं लिंगानुपात के मुताबिक लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में यह पॉंच गुना अधिक होता है। आटिज्म एक बहुत विस्तृत विकार है जिसमे की अलग -अलग बच्चों में कई तरह की “टिपिकल” क्रियाएं देखने को मिलती है. 

 

 

 

बच्चों में तेजी से बढ़ते जा रहे इस डिसआर्डर के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ ( United Nations) के तत्वावधान में अप्रैल माह को ऑटिज्म माह के रूप मनाया जाता है, तथा “World Autism Awareness Day” का आयोजन दिनांक २ अप्रैल को किया जाता है। तथा इस विकार से ग्रसित व्यक्तियों के प्रति *संवेदनशीलता दर्शाने के लिए दुनियाभर की प्रमुख इमारतों को “Light It Up Blue” कैंपेन के अंतर्गत नीली रोशनी से सजाया जाता है।

 

 

All children with autism have problems with 3 major areas – 

Social Interaction

Verbal and Nonverbal Communication

Repetitive Behaviors or Interests

 

 

 

ऑटिज्म के लक्षण( Early Signs of Autism Spectrum Disorder)  बच्चे के विकास की प्रारंभिक अवस्था ( ८ माह से पॉंच वर्ष की आयु) से दिखाई देने लगते हैं जैसे –

 

*सामाजिक मेल मिलाप की कमी*, बच्चा ज्यादातर दूसरों से अलग (कट ऑफ) रहना पसंद करता है 

Social isolation in autism ( representational image only -123rf.com)

Social isolation in autism ( representational image only -123rf.com)

 

*लेक ऑफ स्पीच* ( बहुत कम या फिर बिल्कुल ही नहीं बोलना)

*आइ कांटेक्ट नहीं होना/ कम होना* ( दूसरे व्यक्तियों से बात करते वक्त नजर नहीं मिलाना)

अन्य बच्चों की अपेक्षा *स्लो* प्रतीत होना

*परिजनों के प्रति अलूफ रहना*(माता-पिता से कम अटेचमेंट)

*एक ही तरह के खेल खेलना*

बहुत *जिद्दी होना*, भोजन / कपडों में *बहुत सिलेक्टिव* होना

Signs of autism in kids ( image - healthylife)

Signs of autism in kids ( image – healthylife)

अपनी *जरूरतों को एक्सप्रेस नहीं कर पाना*, अन्य व्यक्तियों की feelings/ expressions को नहीं समझ पाना आदि।

*सेल्फ हार्मिंग बिहेवियर* (स्वयं को काटना/ नोचना)

किसी भी प्रकार का डर नहीं होना ( ऊँचाई से गिरने का/ चोट लगने का)

 

 

*अन्य लक्षणों में शामिल हैं*

*एकटक किसी चित्र/ रंग/ रोशनी को देखते रहना*

*अपने हाथों को देखते रहना*

*एक ही स्थान पर गोल गोल घुमना*

Typical traits in Autism ( image- pinterest.com)

Typical traits in Autism ( image- pinterest.com)

*ध्वनियों/ आवाज के प्रति अति-संवेदनशीलता*

*खिलौनों के बजाए बर्तनों/ चाबी/ हेयर कि्लप / औजारों से खेलना*

*पढ़ाई में कमजोर होना*

*अपने आसपास मौजूद वस्तुओं को एक लाइन में जमाने लगना*

*तेजी से कहीं भी उछलने लगना*

*सड़क/ पार्क/ पब्लिक प्लेसेस पर ही जमीन पर लोटने लगना*

*प्लास्टिक/ कागज/ पन्नी/ मिट्टी चबाना*

Autism brain differs in it's neurotransmission _( image- cdn)

Autism brain differs in it’s neurotransmission _( image- cdn)

ऑटिज्म एक गंभीर मस्तिष्क से जुड़ा हुआ विकार है जिसका वर्तमान में कोई निश्चित ईलाज उपलब्ध नहीं है..

 

परंतु अर्ली एज में लक्षणों की पहचान होने एवं विभिन्न प्रकार की रेमेडियल एंव बिहेवियर थैरेपी के द्वारा ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे भी समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित हो सकते है। 

 

 

 

 

 

Parental Support makes a lot of difference in Autism ( image- healthtips)

Parental Support makes a lot of difference in Autism ( image- healthtips)

Treatment of Autism include certain medications for irritability, hyperactivity, anxiety n depression.

Behaviour Modification Therapy, Occupational Therapy, Sensory Integration Therapy, Special Education, ABA, Play Therapy, Recreational Therapy, Early Intervention Programs are helpful.

 

Children with Autism are unique in themselves, n they can also lead a fruitful life. 

 

 

So it is very important to have understanding regarding the typical signs which the children with Autism shows.. 
Always remember that these children will need your support, understanding and encouragement in every sphere of their lives…

 

 

Stay Healthy.. 

 

 

Dr. Pooja Pathak

 

www.facebook.com/swavalambanchildrenrehab 

Know It, Prevent It: World TB Day 2017

Posted by on Mar 18, 2017 in Swavalamban Blog

Know It, Prevent It: World TB Day 2017

क्या आप जानते हैं की –

 

Tuberculosis (TB) is one of the top 10 causes of death worldwide.

 

In 2015, 10.4 million people fell ill with TB and 1.8 million died from the disease (including 0.4 million among people with HIV). Over 95% of TB deaths occur in low- and middle-income countries.

 

TB statistics in India

TB statistics in India

With India leading the count,largest number of new TB cases occurred in Asia, with 61% of new cases, followed by Africa, with 26% of new cases.

 

In 2015, an estimated 1 million children became ill with TB and 170 000 children died of TB (excluding children with HIV).

 

TB is a leading killer of HIV-positive people: in 2015, 35% of HIV deaths were due to TB.

TB - Global Perspective ( image- cigna.com)

TB – Global Perspective ( image- cigna.com)

 

Globally in 2015, around 480 000 people developed multidrug-resistant TB ( info source- WHO.org )

 

 

 

TB Elimination needs Combind Efforts (image - who.org)

TB Elimination needs Combind Efforts (image – who.org)

जनमानस में क्षय रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ” World TB Day” is observed all across the globe on 24th March.

 

The Theme for this year is ” Unite to End TB” which emphasizes on active participation of all people to identify, cure n prevent TB. 

 

 

Tuberculosis is an airborne disease cause by the Mycobacterium tuberculosis, transmitted from the infected person to another weak person through the droplets formed in the throat or lungs. When a person with lung TB cough, sneeze or spit, they propel the TB germs into the air. When another unaffected person gets in contact with those germs, he/she will too become infected. TB is prevelant in all age groups. 

 

 

 

 

टीबी के कुछ प्रमुख्य लक्षण हैं –

खांसी( जो अधिक समय से हो रही हो ),

बलगम,

खांसने पर बलगम के साथ खून आना,

छाती में दर्द,

कमजोरी/ थकान,

symptoms of TB

symptoms of TB

वजन कम होना,

बुखार,

रात में पसीना आना,

wheezing

respiratory distress.

 

 

 

 

बच्चों को भी टीबी हो सकता है, जिसमे सबसे ज्यादा पल्मोनरी टी बी करीब २०-३०% बच्चों में, miliary disease तथा टी बी मेनिनजाइटिस शिशुओं में होता है. शिशुओं को BCG का टीका लगाकर टीबी से बचाया जा सकता है. 

 

 

Diagnosis of TB is made by – 

 

Acute pulmonary TB can be easily seen on an X-ray
TB skin test he Mantoux TB test
The Interferon Gamma Release Assays (IGRAs)
Serological tests for TB
Smear microscopy of sputum
fluorescent microscopy
Culturing
drug susceptibility tests

 

 

 

Prevention of TB- 

 

टीबी की रोकथाम के लिए सबसे जरुरी है उन व्यक्तियों की पहचान जो एक्टिव कैरियर हो, साथ ही संक्रमण को एक व्यक्ति से दूसरे को फैलने न देना, पीड़ित व्यक्ति को सही समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराना

Prevention is the best remedy

Prevention is the best remedy

 

To prevent people with latent TB from developing active, and infectious, TB disease.

Isoniazid should be taken daily for at least six months and preferably nine months.

खांसी आने पर/ छिकतें समय नाक /मुँह को ढकना

Using face masks

 

 

 

 

TB is a treatable and curable disease. First-line agents include
rifampin, isoniazid (INH), pyrazinamide, ethambutol, andstreptomycin.

Second-line agents are capreomycin, ciprofloxacin, cycloserine,ethionamide, kanamycin,ofloxacin, levofloxacin, and para-aminosalicylic acid.

 

 

Spread more Awareness… Lets make a TB Free World….

 

 

Stay Healthy..!!

 

 

Dr. Pooja Pathak

for Swavalamban Rehab

Pica – महँगी पड़ेगी यह आदत

Posted by on Mar 18, 2017 in Swavalamban Blog

Pica – महँगी पड़ेगी यह आदत

क्या आपका बच्चा कोई भी वस्तु मुँह में डालता है??

क्या बच्चा कागज/ पन्नी/ प्लास्टिक/ क्ले/ पेन/ क्रेयॉन्स आदि मिलने पर उन्हें चबाने लगता है??

अगर हॉं तो the

pica if neglected leades to serious health problems (image- dailymail.co.uk)

pica if neglected leades to serious health problems (image- dailymail.co.uk)

child is having a disorder called Pica.

 

It is very common in Autism n other Developmental Disorders. 

 

According to National Autism Center, Pica is defines as an abnormal craving for non-food items such as paint, dirt or clay,which can lead to several health problems like poisoning, intestinal damage, dental problems, choking. 

 

 

 

कैसे रोकें बच्चों को??

 

 

आप विभिन्न प्रकार की टेक्निक्स को एप्लाई करके अपने बच्चे की क्रेविंग को कंट्रोल कर सकते है।

 

सबसे प्रथम अपने बच्चे को खाद्य एवं अखाद्य पदार्थों के बारे में बताकर उनका

design fun activities wid edible items (image source- healthymealstoyourdoor)

design fun activities wid edible items (image source- healthymealstoyourdoor)

अंतर समझाएं।

 

बच्चे के सामने विभिन्न प्रकार के edible and non-edible items रखकर उन्हें निर्देशित करें की वे उन्हें अलग अलग छांटे।

 

सही करने पर उनकी प्रशंसा कर उन्हें पुरस्कृत करें।

 

 

आप चाहें तो अपने आसपास के अन्य बच्चों को भी सम्मिलित कर इसे खेल का रूप दे सकते है, जिसमें सही sorting करने पर आप बच्चों को points देकर reward दे सकते है। साथ ही अपने बच्चे को अन्य बच्चों का उदाहरण देकर भी आप उन्हें समझा सकते है।

 

Divert kids to purposeful activities ( image- familservice.org)

Divert kids to purposeful activities ( image- familservice.org)

 

 कई दफा बच्चे अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से या अपने आसपास के माहौल से प्रभावित होकर भी उपलब्ध वस्तुओं को कतरने/चबाने लगते हैं।

 

अतः अभिभावकों को चाहिए की वे उनकी इन हरकतों को directly point out करने या टोकने के बजाए बच्चों का ध्यान दूसरी ओर बटॉं दें।

 

 

 

chewy tubes helps to calm down

chewy tubes helps to calm down

चूँकि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों का सेंसरी सिस्टम अन्य बच्चों की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए भी उनमें पिका अधिक रिकार्ड किया गया है।

 

proper oromotor training will soothe sensory sys

proper oromotor training will soothe sensory sys

 

Sensory awareness बढ़ाने के लिए proper brushing, विभिन्न प्रकार के फ्लेवर्ड फूड आइटम्स को चबाना, माऊथ एरिया पर टेपिंग, using chewy tubes, पॉपकार्न चबाना आदि activities आप घर पर करवा सकते हैं। 

 

 

 

 

Pica has been classified into various forms depending upon the consumption of particular material. 

Types of Pica ( image- slidesharecdn)

Types of Pica ( image- slidesharecdn)

 

 

 

 

Pica at times may be difficult to handle, parents often face a lot of probles becuse of it. Somtimes the child chooses pica as a form of “self-soothing” act in order to prevent anxiety or when the child’s arousal reaches to a certain level. Hence, It’s utmost important to keep your kids busy in purposeful and constructive activities. 

 

 

 

Stay Healthy..!!

 

 

Dr. Pooja Pathak 

for Swavalamban Rehab

Understanding Sensory Ataxia

Posted by on Mar 17, 2017 in Swavalamban Blog

Understanding Sensory Ataxia

Have you come across to a person who seems to have poor coordination with his/her bodily movements and balance?? this could be Ataxia.

 

Ataxia या गतिभंग से ग्रसित होने पर व्यक्ति को शारीरिक संतुलन एवं अंगों के बीच के तालमेल को बनाये रखने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है as the parts of Nervous system that controls Movement n Balance are affected.

Ataxia can be both: a symptom of incoordination related to nervous system or it can also belong to specifis hereditary degenerative disorders.

 

 

 

क्यों होता है Ataxia ??

 

मूल रूप से इसे समझने के लिए दो वर्गों में विभाजित किया गया है :

Inherited अर्थात अनुवांशिक जो की माता-पिता में से किसी एक के जीन्स में से आया हो

या Non-Inherited जिसमे शामिल है Head injury, Stroke, Infections, Brain Tumors, Cerebral Palsy, Multiple Sclerosis etc.

साथ ही विटामिन B१२ or E की कमी से भी यह हो सकता है.

आपने कभी न कभी किसी ऐसे व्यक्ति को जरूर देखा होगा जो अँधेरे में या आँखें बंद करने पर अपने आपको बैलेंस नही कर पाता हो, this could be Sensory Ataxia. तांत्रिक तंत्र में आई किन्ही खामियों की वजह से सेंसरी अटैक्सिया होता है, जिसमे affected person के Proprioception sensibility कम/घट जाती है.

 

 

Proprioception is the ability to sense the position, location, orientation and movement of the body and its parts. जहाँ Cerebellar Ataxia में व्यक्ति के लगभग सभी मूवमेंट्स अनियंत्रित होते है वही सेंसरी अटैक्सिया में व्यक्ति की आँखें जब बंद करवाई जाती है अथवा अँधेरे एवं मद्धम रौशनी वाली जगहों पर ही उसमे लक्षण परिलक्षित होते है. कुछ व्यक्तियों में दोनों ही प्रकार के अटैक्सिया के लक्षण होते हैं.

 

 

सेंसरी अटैक्सिया को डाग्नोस करने के लिए रोम्बर्ग टेस्ट ( Romberg Test) किया जाता है, जिसमे the person has to stand with his/her feet touching each other while eyes remain closed foe about a minute. In case of Positive Sign, the person will not be able to maintain his/her balance n swaying or toppling occurs.

 

 

Other Symptoms of Ataxia include:

Improper Balance n Limb Co-ordination

Dysarthria

Gait Abnormalities

Vision/ Hearing Problems

Postural Instability

Nystagmus ( involuntary eye movements)

Spinal Deformity like Scoliosis

Problem while Feeding, Grooming, Buttoning, Hand Writing

Difficulty in Swallowing

Depression

Fatigue

 

 

 

Managing Ataxia:

अटैक्सिया का कोई निश्चित इलाज नही है, परंतु विभिन्न प्रकार की Adaptive Devices and Rehabilitation Therapies के द्धारा व्यक्ति अपने आपको ज्यादा फंक्शनल एवं फिट रख सकता है.

 

 

Occupational Therapy plays a major role in managing a person having Ataxia. Person can perform Activities of Daily Living with much ease n remain Functional by following certain Adaptive n Work Modification Techniques. Also they are trained by applying Ergonomic Principles, thereby causing less Fatigue while performing their respective Daily Chores like Feeding or Writing. Simple Co-ordination activities ensures better Gross n Fine Motor Co-ordination thereby enhancing self-esteem of affected person.

Physical Therapy focuses on maintaining Strength n Mobility

Speech Therapy

Counseling

Proper Dietary Supplements

Splinting/ Orthosis/ Braces to prevent Deformity

Medicines

Although Sensory ataxia can cause several problems, yet it can be managed n affected person will lead a Functional n Productive Life by having an indept understanding of it n by regularly following Therapy Intervention Programmes.

 

 

Stay Healthy..!!!

 

 

 

Dr. P Pooja
for Swavalamban Rehab

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