Health Blog

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Do read interesting articles by Dr. Pooja Pathak, Founder and Occupational Therapist, Swavalamban – on Health, Wellness, Lifestyle, Childhood disorders, Parenting, Therapies n many more… Also find latest updates on major Social Issues..

 

Stay Healthy n Keep Reading..!! 🙂 🙂 

Watch Out the Thief of Sight, Protect Your Eyes – Glaucoma

Posted by on Mar 17, 2017 in Swavalamban Blog

Watch Out the Thief of Sight, Protect Your Eyes – Glaucoma
Glaucoma can affect anyone

Glaucoma can affect anyone

Glaucoma (कांचबिंद) एक प्रकार का नेत्र रोग है जिसमे अफ्फेक्टेड व्यक्ति की आँखों की रौशनी धीरे धीरे ख़त्म होती चली जाती है.

 

 

It is a group of eye diseases, caused due to optic nerve damage and can affect one eye or both.

 

 

People with high intraocular presssure are at greater risk of getting it, (intraocular pressure i.e. fluid pressure inside the eyes rises slowly , thereby damaging the optic nerve, and resulting in loss of vision). Acc. to an estimate around 4.5 million people worldwide are having glaucoma, which is expected to increase to 76.0 million in 2020, वहीँ हमारे भारत में glaucoma is the third leading cause of blindness.

 

छोटे बच्चों में कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

child’s eyes particularly sensitive to sunlight or a camera flash सूरज की किरणों अथवा तेज चमकीली फ्लैश/कैमरा लाइट के प्रति अतिसंवेदनशीलता

child’s eyes have difficulty adjusting in the dark अँधेरे/कम रौशनी वाली जगहों पर ज्यादा दिक्कत होना

Glaucoma can affect children too!!

Glaucoma can affect children too!!

child complain of headaches and/or eye pain सिरदर्द/ आँखों में दर्द

child blink or/and squeeze his/her eyes often बार-बार आंखें मसलना

child have red eyes all the time आँखें लाल होना/ पानी आना

 

 

 

ग्लूकोमा के अनेक प्रकार होते हैं पर मुख्यतः इसे समझने के लिए दो वर्गों में विभाजित किया गया है –

Dimnished Vision in Glaucoma

Dimnished Vision in Glaucoma 

प्राइमरी – जिसका कोई स्पष्ठ कारण नही है

 

सेकेंडरी – जो किसी अन्य प्रकार के विसुअल डिसऑर्डर के कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से हो. बच्चों से लेकर उम्रदराज व्यक्तियों तक किसी को भी कांचबिंद हो सकता है.

 
Glaucoma doesn’t have specific signs n symptoms, hence it’s sometimes difficult for the affected person to realizt that he is having problem in vision, resulting in causing blindness.

 

 

Therefore early diagnosis plays an integral role in reducing the percentage of blindness.

 

Open-angle Glaucoma shows no symptoms other than slow vision loss while

Angle-closure Glaucoma is a medical emergency in which a perso complains of eye pain n visual disturbances.

 

 

Several tests like Visual Acuity Test, Visual Field Test, Dilated Eye Examination, Tonometry are performed to confirm the diagnosis.

 

 

 
अभी तक इसका कोई निश्चित इलाज नही है, पर कुछ विशेष तरह की दवाइयों, eye drops एवं सर्जरी, Laser Trabeculoplasty द्वारा glaucoma के प्रोग्रेशन को स्लो किया जा सकता है.

 

 

Stay Healthy..!!!

 

 

 

Dr. Pooja Pathak

 

जल – नहीँ रहेगा कल!! World Water Day 22 March

Posted by on Mar 17, 2017 in Swavalamban Blog

जल – नहीँ रहेगा कल!! World Water Day 22 March

Water for Life

जल – जीवन की ज्योति, जल बिना जीवन की कल्पना करना भी कठिन है.

न सिर्फ मनुष्यों अपितु समस्त प्राणियों एवं जीव- जंतुओं की उत्तरजीविता (सर्वाइवल) के लिए भी पानी की उपस्थिति अनिवार्य है.

पानी न सिर्फ हमारे कंठ को तृप्त करता है, अपितु पानी पर ही हमारी समस्त भौतिक अवशकताएं.. हमारा भोजन.. हमारी ऊर्जा.. हमारी अर्थव्यवस्था और हमारा इकोसिस्टम आश्रित है.

 

 

 

एक अनुमान के अनुसार आज समस्त विश्व के अनेकों क्षेत्रों में करीब ७४८ करोड़ लोगों को पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नही है. Fetching Drinking water is still a major problem

जिस तीव्र गति से आज बढ़ती हुए आबादी के कारण नगरों का विस्तार होता जा रहा है, जल की उपलब्धता उतनी ही कम होती जा रही है.

एक अध्ययन के अनुसार भारत में प्रति वर्ष 1 लाख से ज़्यादा लोगों की मृत्यु दूषित पानी से होने वाले रोगों की वजह से होती है.

 

 
World Water Day is observed on 22 March to raise awareness among people about the measures taken to ensure water conservation. इस वर्ष की थीम है “Wastewater” जो की हमें पेयजल को संरक्षित करने की और प्रेरित करती है.

 

 

 

रोजाना हमारे शहरों/गांवों/घरों, खेतों/ उद्दयोगों में हजारों-लाखों लीटर पानी उपयोग के बाद प्रदूषित होकर नदियों -तालाबो में मिलता है, जिससे हमारे पर्यावरण को बहुत क्षति पहुचती है. (अगर धरा पर उपलब्ध जल को उसके उपयोगानुसार बांटकर देखा जाये तो पानी का सबसे ज़्यादा उपयोग ७० % कृषि आधारित क्षेत्रों में किया जाता है. साथ ही औद्योगिक एवं ऊर्जा क्षेत्रों में अनुमानतः करीब २०% और घरेलु उपयोग में १० % जल का उपयोग होता है.)

 

 

 

बेतहाशा पानी का उपयोग करने की हम सबकी आदत को अब बदलने की जरुरत है.

Steps to Save Water in Everyday Life

Steps to Save Water in Everyday Life

साथ ही वाटर-रीसाइक्लिंग एक अच्छा विकल्प है जिसके द्वारा हम जल को पुनः उपयोग के योग्य बना सके.

 

साथ ही ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण, जंगलों/वनों का संरक्षण, प्राकृतिक स्थान के अनुसार सही प्रकार की वनस्पतियों का चुनाव, कृषि कार्यों में आर्गेनिक/ जैविक खाद का उपयोग, ड्रिप इरीगेशन का उपयोग जल संचय के लिए लाभदायक होगा.

 

 

 

अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ परिवर्तन करके हम सभी लोग पानी को बचा सकते है. 

Water Conservation Starts with You

Water Conservation Starts with You

रेनवाटर हार्वेस्टिंग, पुराने कुँओं/ बावड़ियों की साफ़-सफाई, तालाबों/नदियों का गहरीकरण आदि में जनमानस की सक्रिय सहभागिता अति आवश्यक है.

 

 
As countries develop and populations grow, global water demand (in terms of withdrawals) is projected to increase by 55% by 2050. Already by 2025, two thirds of the world’s population could be living in water-stressed countries if current consumption patterns continue.

 
पानी के स्रोतों को स्वच्छ एवं निर्मल बनाये रखना प्रत्येक नागरिक का कर्त्यव है.

 

 

 

Water is For All, Save It

Water is For All, Save It

Take a pledge to Save Water Now…

 

Every Drop Counts…

 

 

 
Dr. Pooja Pathak

for SwavalambanRehab

तुम देना साथ मेरा.. World Mental Health Day 10 Oct

Posted by on Oct 9, 2016 in Swavalamban Blog

तुम देना साथ मेरा.. World Mental Health Day 10 Oct

कौन नही चाहता स्वस्थ रहना, वाकिंग, जॉगिंग, पुश-अप्स, डाइटिंग, जिमिंग,डांसिंग, और न जाने कितनी तरह के जतन करते हैं लोग आजकल  हेल्दी रहने की लिए. पर क्या आपने कभी सोचा है की ये सभी सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य या कहें फिजिकल अपियरेंस पर ही ज्यादा फोकस्ड होता है, कोई भी सामान्य इंसान अपने भौतिक रंग-रूप  एवं फिजिक की प्रॉब्ल्म्स  को खुलकर शेयर कर लेता है, परंतु जब बात आती है साइकोलॉजिकल प्रॉब्ल्म्स की, तब वही इंसान  अपने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ओपनली अपने मित्रों या इष्टजनों से डिस्कस करने से भी कतराता है. 

 

 


हमारे भारत में आज भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विषयों को लेकर कितनी हे भ्रांतियां फैली हुई है. महानगरों जहाँ फिर भी बेहतर हालात है, सबसे ज्यादा ख़राब स्तिथी छोटे शहरों एवं कस्बों की है जहाँ न इन विकारों/विषयों के प्रति लोगों में जागरूकता है और न ही किसी भी प्रकार के परामर्श-केंद्र हैं.



 

 

According to a recent study, it has been estimated that nearly 50 millions Indians r suffering from one or other type of Mental Health related issues/disorders. however there is no exact data as people are too shy to discuss these issues.

 

Since ages, Mental Health issues have many stigmas attached, n people along wid their families have to face a lot of discrimination n isolation due lack of awareness about it’s proper management. 

 

 

 

 

 

 

World Mental Health Day” has been observed every year on 10th of October in order to raise awareness about the importance of mental well-being of a person n to abolish the tabooes associated with mental health disorders. 

 

 

The theme for this year is “Psychological First Aid“.  Just as a person needs priliminary “first-aid” in case of any sort of physical injury, likewise s/he also needs the same help in case of psychosocial disorder. 


 

 

 

This day also encourages the care-givers, families, community n health-workers who also have to keep a strong determination, n perseverence while taking care of the receivers.  

 

 

 

एंड्रोइड, आई-फ़ोन, फेसबुक और 4-G के वर्ल्ड में जहाँ आज सभी चुटकियों में अपने “फ्रेंड्स” से 24×7 कनेक्टेड रहते हैं, साथ ही  तमाम तरह के अत्याधुनिक लाइफ-स्टाइल प्रोडक्ट्स ऐशो-आराम के लिए अवेलेबल हैं, वहीँ लोगो में Anxiety, Depression, Stress, Insomnia, Increased Alcohol n Drug consumption, Psycho-somatic Disorders, Suicidal tendencies, n many more. Some other signs of Stress include bad mood, easily being upset, losing interst in job, frequent headache, palpitations, pain, withdrawl from social gatherings. 

 

 

 

 

 

Mental health related issues not only effect a person, but it also affects his/her whole family, n their community in a broader sense. Although, in case of Early Identification n Proper Medical Intervention along with several Therapies, Relaxation methods n Life-style Modification techniques, a person can lead a fruitful life. 

 

 

 

Always Remember that Awareness can Save many Lives… 

 

 

 

Extend Support, Share your Time with Loved ones…

 
 
 
 
 
( Image for Representation purpose only/ image source – onlyyouforever/google images)

 

 

 

Dr. P Pathak

Swavalamban Rehab

दिल धड़कने दो..!! One Heart, One Life…

Posted by on Sep 24, 2016 in Swavalamban Blog

दिल धड़कने दो..!! One Heart, One Life…

 

NO BEAUTY SHINES BRIGHTER THAN THAT OF GOOD HEART..!!!







Heart is not only one of the most vital organ of body, but till ages it symbolizes love, care n compassion. Whether a person is happy or sad, excited or depressed, the heart will be affected the most. 





Thus, maintaining a good heart health is very important not only for a longer life, but for enjoying a healthy n hearty life.





तेज़ी से बदलती हुए जीवन-शैली के परिणामस्वरूप हृदय रोगों की संख्या में भी अत्यधिक इज़ाफ़ा हुआ है, अतः समस्त विश्व में लोगों को हार्ट हेल्थ एवं हृदय रोगों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ” World Heart Day”  का आयोजन प्रतिवर्ष  29 September को  किया जाता है. 

 

 

This observance also inform people about cardiovascular diseases, which are the biggest cause of death. The day promotes preventative measures to reduce the risk of cardiovascular diseases. 

 

The theme for this year is ” Power Your Life” which focuses on healthy lifestyle measures which need to be incorporated in everyday life in order to prevent the risk of CVD ( cardio-vascular diseases). 

 

 

Cardiovascular diseases are the number one cause of death worldwide and this is projected to remain so, according to WHO. About 17.5 million people died from cardiovascular disease in 2005, representing 30 percent of all global deaths. 



Some of the factors which leads to the risk of cardiac disorders n stroke include:

 

 

 high level blood pressure   


– high cholesterol and glucose levels


– tobacco n smoking


 inadequate intake of fruit and vegetables


 obesity


– physical inactivity

 

 

Heart related disorders are not only confined to adults, but it can affect any age group. Children are also vulnerable too. About 1.35 million babies are born with congenital heart disease every year. Moreover, children may have to face the emotional consequences of seeing a loved one becoming ill with CVD.


The unhealthy lifestyles that lead to cardiovascular disease often begin in childhood and adolescence, so that prevention of heart disease must begin there. A healthy heart starts from childhood, the best time to adopt heart-healthy behaviors and reduce risks.

 

 

The risk factors can be eliminated/ prevented by adapting certain lifestyle modification techniques n switching on to a better n healthier lifestyle.



 

a. Get, Set n Go…

 

 

Get physically active, keep yourself moving. Do exercises n work-outs: be it jogging, walking, cycling, swimming, or even gardening. 




b. Eat Good, Feel Good…



Add up a lot of fresh fruits n veggies in ur diet, avoid junk food, avoid taking too much oily n spicy stuff daily, cut out salt intake, try not to take too much sugary dishes.



c. Say No…



Avoid second hand smoking, quit tobacco use n smoking…



d. Regular Health check-up…



Get yourself checked for routine blood pressure, cholesterol, sugar level. Have an eye on your body-weight, measure your Body Mass Index…


 

 

Thus, by making some simple lifestyle changes we can make our heart  more healthy n happy…








SO, DO TAKE GOOD CARE OF YOUR HEART…





AS WE ONLY HAVE…


ONE LIFE, ONE HEART!!!








Dr. P Pathak


@swavalambanrehab.com

 

 

( image for representation purpose only, image credit: google images)  

Beware before It Breed – Stop Dengue

Posted by on Sep 10, 2016 in Swavalamban Blog

Dengue fever, a painful debilitating condition, is caused by the bite of Aedes mosquito infected with dengue virus. 


 

 Dengue Virus

When a mosquito bites someone who is having the dengue virus, then it got infected n hence keeps on transmissing the virus from one person to another through it’s bite.


 

 

 

Dengue does not gets spread from one person to another directly. The incubation period is from 3 to 15 days before initial signs n symptoms begin to appear. 







Symptoms of Dengue include:

 

 

Fever


Headache


Muscle n joint pain


Exhaustion


Abdominal pain


Nausea/ Vomiting 

 

Loss of appetite/ malaise


Pain in eyes


Rash on skin 


Bleeding, Haemorrhage


Circulatory shock









 

 

According to WHO, there are 390 million of Dengue cases have been recorded worldwide, in which around 90 thousand needs immediate medical attention. 






Till today, there has been no specific drug to cure Dengue completely,so the primary focus is on eliminating the breeding areas of mosquitoes, n preventing oneself from the bite of it. 









Measures for Dengue Prevention: 

 

 

The best way to prevent the menace of Dengue is maintaining Cleanliness in n around living areas.

 

 

 

The mosquitoes breed in stagnant water, so be careful about the places/ objects in which water has been collected for long period of time.


Empty flower vase/ vessels, tyres,trash canes.

Clean water storage tanks at regular intervals.

Wear long sleeve clothes, long pants

Use mosquito repellants 


Sleep under mosquito nets 

Do intense fogging in endemic areas

Secure door n windows of ur home. 






So guys, follow cleanliness n hygiene principles n Stop Dengue…







Stay Healthy..!!!









Dr. Pooja Pathak 




Swavalamban Rehab 


 

 

( image credit: newindianexpress.com) 

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