A recent report found that the number of people with Alzheimer’s and related dementia has reached 46.8 million worldwide, a number that may double every 20 years. In India alone, more than 4 million people are diagnosed with some form of Alzheimer’s.
समस्त विश्व में Alzheimer’s रोग के प्रति जन-सामान्य में जागरूकता लाने तथा इसके उपचार/ रिहेबिलिटेशन प्रोसेस का प्रचार- प्रसार करने के उद्देश्य से सितंबर माह को World Alzheimer’s Month के रूप में मनाया जाता है।
डिमेंशिया स्वयं एक बीमारी न होकर मस्तिष्क को एफेक्ट करने वाली कई अन्य बिमारियों का लक्षण मात्र होती है (जैसे एल्ज़ीमर्स डिसीज़ या पार्किंसन डिसीज़). एब्नार्मल प्रोटीन्स से बनी हुई प्लाक मस्तिस्क में मौजूद नर्व सेल्स को डेड कर देती है, जिससे दिमाग में सिकुड़न होने लगती है, जो सूचनाओं को प्रवाहित करने वाले नर्व सेल्स को एफेक्ट करती है.
इस अवरुद्धता के कारण पीड़ित व्यक्ति की सोचने एवं याद रखने की शक्ति कम होती जाती है.जब ये हिप्पोकैम्पस एरिया पर आघात करती है तब इंसान नयी याददाश्त नही बना पाता है ( अर्थात तब किसी भी प्रकार का सीखा गया नविन कार्य इंसान भूल जाता है, क्यूंकि दिमाग उन निर्देशों को स्टोर नही कर पता है).
डिमेंशिया के कुछ मुख्य लक्षण :
– स्मरण शक्ति (याददाश्त ) कमजोर होना
– जरुरी घटनाएँ , तिथियाँ , या लोगों के नाम भूल जाना
– कोई भी कार्य या प्रक्रिया करने के कुछ समय पश्चात भूल जाना
– दिशाएं/रास्तें भूल जाना
– एक ही प्रश्न बार-बार पूछना
– कोई भी नया कार्य करते समय उसके दिशा-निर्देशों को नही समझ पाना
– अंकों से सम्बंधित कार्यों को करने में परेशानी ( बिल भरना, खरीददारी करना)
– दैनिक जीवन के कार्य जैसे गाड़ी चलाना, रसोई बनाना आदि में भी दिक्कत होना
– कन्फ्यूज्ड या भ्रमित होना
– सामान्य वार्तालाप में परेशानी होना, अपनी बात को ठीक से अभिव्यक्त नही कर पाना, एक ही बात कई बार दोहराना
– स्वयं का सामान रखकर भूल जाना
– निर्णय क्षमता प्रभावित होना, एक ही दिन में कई बार स्नान करना, स्वयं का ख्याल नही रखना
– सामाजिक मेल-जोल कम करना, ज्यादा समय घर में ही बिताना
– मूडी होना, जल्दी उदास हो जाना
– अन्य लोगों पर अन्यावशयक संदेह करना, भरोसा नही करना
– मति-भ्रम होना
डिमेंशिया का कोई निश्चित ईलाज नही है, पर इसके लक्षणों की गति को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कुछ मेडिसिन्स, Occupational Therapy, सेंसरी थेरेपी, फैमिली थेरेपी, Group Therapy, आर्ट एंड म्यूजिक थेरेपी, एक्सरसाइजेज, डाइट एवं सही न्यूट्रिशन से पीड़ित व्यक्ति भी अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है.
Dr P Pathak