दर्द भरी ये ऐंठन : Understanding Dystonia

Posted by on Sep 10, 2016 in Swavalamban Blog

 

डिस्टोनिया एक न्यूरोलॉजिकल मूवमेंट डिसऑर्डर है जिसमे अफेक्टेड व्यक्ति की मांसपेशियों में अनियंत्रित रूप लगातार या रुक-रुक कर संकुचन या खिचांव होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति का मूवमेंट या पोस्चर असामान्य हो जाता है, कितनी ही बार हाथों या पैरों में कम्पन ( ट्रेमर्स ) भी होता है. 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डिस्टोनिया कोई एक मसल ग्रुप या फिर संपूर्ण शरीर को भी एफेक्ट कर सकता है, जैसे की हाथ, पैर, गर्दन, चेहरा, अथवा वोकल कॉर्ड्स. अब तक के रिसर्च में यह पता लगा है की मस्तिष्क में स्थित बेसल गैन्ग्लिया एरिया एवं मूवमेंट को नियंत्रित करने वाले पार्ट में किसी प्रकार का आघात या क्षति होने के कारण डिस्टोनिया होता है.

 

कुछ मुख्य लक्षण डिस्टोनिया के इस प्रकार है: 

एड़ी या पंजे में ऐठन


 कुछ दूर चलने के बाद पैर जमीन पर घिसटने लगना ( foot dragging)

नैक क्रैंप , गर्दन का एक ओर मुड़ जाना 

 

कुछ भी लिखते समय हाथों में कम्पन, हाथों की मांसपेशियों का टाइट हो जाना, उँगलियों का मुड़ जाना 

अनियंत्रित होकर पलकों का झपझपना , तेज़ रौशनी या सुन लाइट में आँखों  में तकलीफ होना , भारीपन होना 

आवाज़ की क्वालिटी में परिवर्तन होना, आवाज़ कर्कश व भारी होना 

शरीर में अनियंत्रित ऐंठन/ ट्रेमर 

थकान 

तनाव 

 

 

 

डिस्टोनिया प्रभावित व्यक्ति की मानसिक क्षमता को एफेक्ट नहीं करता है, परन्तु इससे पीड़ित होने पर इंसान को डिप्रेशन या एंजायटी हो सकती है.

Dystonia has been classified into various types according to the specific body part which is affected most by it. 

 

 

Some of these are:

 

 

Generalized शरीर का ज्यादातर भाग प्रभावित होता है 

 

Focal : कोई एक विशेष भाग की एफेक्ट होता है 

 

Multi-focal : 2 or more unrelated body parts

 

Segmental : 2 or more adjacent parts of body

 

Hemidystonia : शरीर के सामान भाग का हाथ एवं पैर

 

 

 

 

 

 

Dystonia किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, इसे मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है:

 

 

1. Early-onset dystonia :  begins with symptoms in the limbs , may progress to involve other regions. Some symptoms tend to occur after periods of exertion and/or fluctuate over the course of the day.

 

 

 

2. Adult-onset dystonia :  involves one or adjacent parts of the body, most often involving the neck and/or facial muscles.  Acquired dystonia can affect other regions of the body.

 

 

Dystonias often progress through various stages. Initially, dystonic movements may be intermittent and appear only during voluntary movements or stress. Later, individuals may show dystonic postures and movements while walking and ultimately even while they are relaxed. Dystonia can be associated with fixed postures and shortening of tendons.

 

डिस्टोनिया का उपचार : Managing Dystonia

 

 

अभी तक मेडिसिन में कोई निश्चित इलाज नहीं है जो डिस्टोनिया के प्रोग्रेशन को रोक सके, पर इसके कुछ लक्षणों की रोकथाम के लिए अनेक विकल्प मौजूद है, जैसे:

Botulinum toxin, 


Medicines such as Anticholinergic agents, Dopaminergic agents, 


Deep Brain Stimulation


Physical Therapies


Occupational Therapy


Postural Awareness


Ergonomics


Speech Therapy


Relaxation Therapy 


Bio-feedback


Stress Management, etc.

 

 

 

 

It’s painful to have Dystonia, but with active lifestyle n following the guidance given by Health Care Professionals will generate positive results…

 

 

Stay Healthy..!!

( image for representation purpose only, image credit: momjunction.com)

 

 

 

Dr. Pooja Pathak

for Swavalamban Rehab 

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